

सनातन धर्म पर टिप्पणी को लेकर संत समाज में रोष
बीकानेर। तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म को लेकर दिए गए बयान पर विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों में विरोध देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि “सनातन धर्म, जो लोगों के बीच भेदभाव करता है, उसे समाप्त कर देना चाहिए।” इस बयान के बाद देशभर में राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई संगठनों एवं दलों ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया है। इस बयान पर विरोध जताते हुए सरजूदास महाराज ने कहा कि “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का संदेश देने वाले सनातन धर्म का अपमान कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी धर्म के अस्तित्व को समाप्त करने जैसी बातें अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय हैं। ऐसे बयानों पर कानून के अनुसार समय रहते कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति देश की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का दुस्साहस न कर सके।
