

चिकित्सकों ने साझा किया नवीनतम ज्ञान
बीकानेर। पीडियाट्रिक सोसाइटी के तत्वावधान में “हीमोफीलिया में इनहिबिटर प्रबंधन” विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक कार्यक्रम में शहर के 50 से अधिक बाल रोग विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों एवं रेजिडेंट चिकित्सकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में डॉ. जी. एस. तंवर ने हीमोफीलिया में इनहिबिटर को सबसे बड़ी चिकित्सकीय चुनौती बताते हुए कहा कि यदि किसी रोगी में जोड़ों में रक्तस्राव सामान्य से अधिक समय तक बना रहे या अपेक्षित मात्रा से अधिक फैक्टर की आवश्यकता पड़े, तो चिकित्सकों को इनहिबिटर की संभावना पर अवश्य विचार करना चाहिए। वैज्ञानिक सत्र के दौरान डॉ. गौरव गोम्बर एवं डॉ. श्याम अग्रवाल ने हीमोफीलिया में इनहिबिटर के ऐतिहासिक विकास से लेकर आधुनिक उपचार पद्धतियों तक विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिससे उपस्थित चिकित्सकों को महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि क्षेत्र के चिकित्सक नवीनतम चिकित्सा ज्ञान से अद्यतन रह सकें और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध करा सकें।
