

नेत्रदान कर बाफना ने दिया मानव सेवा का प्रेरणादायी संदेश
बीकानेर। चन्दनमल बाफना ने मरणोपरांत नेत्रदान कर मानव सेवा और परोपकार का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। परिजनों की सहमति से संपन्न हुए इस नेत्रदान से किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में नई रोशनी, नई दृष्टि और नई आशा का संचार होगा। जानकारी के अनुसार स्वर्गवास के पश्चात उनके परिवारजनों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान के लिए सहमति प्रदान की। यह निर्णय परिवार के सेवा भाव, सामाजिक जागरूकता और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता है। परिवारजनों ने कहा कि नेत्रदान सबसे बड़ा दान माना जाता है, जिससे किसी जरूरतमंद को नई जिंदगी देखने का अवसर मिल सकता है। नेत्रदान के लिए सहमति देने वालों में उनकी पत्नी सज्जनदेवी सहित मनोज कुण्डलिया, संगीता, बबीता, रंजीता, धर्मयसा एवं अन्य परिवारजन प्रमुख रूप से शामिल रहे। इस दौरान विक्रम मालू, चमन श्रीमाल, लाला झंवर, प्रकाश झंवर, महेन्द्र दूगड़, बाबूलाल बाफना, मनोज कुण्डलिया, विकास मालू, बबीता कुण्डलिया, सुशीला बाफना, रोहित झंवर, मोहिनीदेवी मालू सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं परिजन उपस्थित रहे। समाज के प्रबुद्धजनों ने इस नेत्रदान को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि ऐसे कार्य लोगों को मानव सेवा और अंगदान के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
