

चंदा-पाग कला पर परिसंवाद आयोजित
बीकानेर। राजस्थानी साफा-पाग पगड़ी कला संस्थान एवं थार विरासत की ओर से नगर स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित 6 दिवसीय ‘उछब थरपणा’ कार्यक्रम के चौथे दिन चंदा-पाग कला के अनछुए प्रसंग विषयक परिसंवाद का आयोजन किया गया। साहित्यकार कमल रंगा ने चंदे के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नगर स्थापना के दिन चंदा जहां-जहां उड़ाया गया और जहां-जहां वह गिरा, वहीं-वहीं बीकानेर की सीमा (शफील) निर्धारित की गई। उन्होंने बताया कि रियासत काल में सभी जाति पंचायतें चंदा उड़ाने की परंपरा निभाती थीं। चंदा मथेरन जाति के लोग बनाते थे तथा इसमें संबंधित जाति के इष्ट देव का चित्र भी अंकित किया जाता था। इस अवसर पर पुनीत कुमार रंगा, डॉ. राकेश किराडू एवं मोना सरदार डूडी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम में गोपीकिशन छंगाणी, गौरीशंकर व्यास, मोहित पुरोहित, आशीष रंगा, अशोक शर्मा, राहुल आचार्य, धर्मेन्द्र छंगाणी, मनमोहन पालीवाल, मरुधरा बोहरा, तोलाराम सारण, अख्तर अली, कन्हैयालाल, चंपालाल गहलोत, सोहन मोदी, भंवर मोदी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
