Bikaner Bikaner District Rajasthan

आत्म चिंतन के बिना आत्म कल्याण संभव नहीं

आत्म चिंतन के बिना आत्म कल्याण संभव नहीं
बीकानेर। प्रभु की वाणी को हमने इस जन्म में प्रभु से नहीं सुनी, परन्तु गुरु से सुनी है। कहने को हम स्वयं को जैन कह रहे हैं। लेकिन, हमारी अरिहंत में श्रद्धा नहीं है। हमने मिथ्या को पकड़ रखा है। यह उद्गार ‘महावीर मेरा पंथ’ के संयोजक सीए सुरेन्द्र जी राखेचा (सूरत) ने सोमवार को नोखा रोड स्थित डागा पैलेस में अपने संबोधन में व्यक्त किए। उन्होंने अनेकानेक उदाहरणों के द्वारा जैन धर्म की विशेषताओं को अवगत कराने के साथ धर्म को मन, वचन और कर्म से अपनाने की बात पर बल दिया। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘मैं और मेरे महावीर’ का सार के वाक्याशों का सुक्ष्मता के साथ विवेचन किया। कार्यक्रम में विवेचनकार गर्वित कोचर, लोकेश जैन, सुदेव डोशी, लीना जैन, अंकित कोचर, श्रीमती रुचि जैन ने ऊं, नवकार मंत्र, धर्म और अराधना को लेकर अपने दृष्टिकोण से अवगत कराया। कार्यक्रम पश्चात सधर्मी लोगों के लिए गौतम प्रसादी का आयोजन भी किया गया।

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