

पर्युषण पर्व पर हुए नवान्हिक कार्यक्रम
बीकानेर। पर्युषण पर्व के प्रथम दिन खाद्य संयम दिवस पर अपने उद्गार प्रकट करते हुए उग्रविहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमलकुमार जी स्वामी ने फरमाया कि साधना के लिए भी शरीर हमारा परम सहायक होता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन की आवश्यकता रहती है भोजन अगर पध्य और सीमित होता है तो स्वास्थ्य स्वस्थ रह सकता है। अपध्य भोजन से नाना प्रकार के विकार उत्पन्न हो सकते है जिससे शरीर अस्वस्थ हो सकता है अस्वस्थ शरीर से न साधना हो सकती है न ही अध्ययन, अध्यापन, व्यापार आदि संभव है इसलिए खाद्य संयम को प्रथम दिवस ही रखा जाता है। शरीर स्वस्थ रहता है तो समाई कमाई पढाई करने में सुविधा हो सकती है।
