

बीकानेर के अनेक ज्योतिषियों, वास्तु शास्त्रियों और विद्वान पंडितों ने शहर को दिलाई नई पहचान
बीकानेर। वास्तुविद राजेश व्यास की पुस्तक ’सुफल वास्तु’ का रविवार को बेसिक सभागार में विमोचन हुआ। मुक्ति संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीकानेर (पश्चिम) विधायक जेठानंद व्यास मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि वास्तु हमारे जीवन में सुगमता प्रदान करता है। यह पुरातन पद्धति है, जो वास्तव में वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर संचालित होती है। उन्होंने कहा कि राजेश व्यास ने अपनी साधना को पुस्तक के रूप में प्रकाशित कर इसे जन-जन तक पहुंचाने का काम किया है। इससे वास्तु के सिद्धांतों से आमजन रूबरू हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि बीकानेर के अनेक ज्योतिषियों, वास्तु शास्त्रियों और विद्वान पंडितों ने शहर को नई पहचान दिलाई है। यहां धर्म, कर्म अध्यात्म की त्रिवेणी बहती है, जो बीकानेर को दूसरे शहरों से अलग बनाती है।
अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि-कथाकार राजेंद्र जोशी ने कहा कि कुशल वास्तु शास्त्री वह होता है, जो दोष का निदान सरलता, सहजता और कम से कम व्यय में करवाए। वास्तु भयानकता, भय और पीड़ा देने वाला नहीं, दुःख दूर करने वाला होता है। राजेश व्यास की वास्तु पुस्तकों की सरलता और सहजता इसकी सबसे बड़ी खूबी है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए खेल लेखक मनीष जोशी ने कहा कि आज के भागमभाग के दौर में आम जन का झुकाव ज्योतिष, वास्तु और ऐसी विधाओं की ओर हुआ है। ऐसे में यह पुस्तक आमजन के लिए लाभदायक होगी। स्वागताध्यक्ष के रूप में बोलते हुए जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक डॉ. हरिशंकर आचार्य ने राजेश व्यास की सृजन यात्रा पर प्रकाश डाला। राजेश व्यास ने पुस्तक के विभिन्न पहलुओं के बारे में बताया तथा वस्तु से जुड़े विभिन्न तथ्य साझा किया। पुस्तक के लेखक राजेश व्यास ने कहा कि उनका प्रयास है कि वास्तु के सिद्धांतों को अंधविश्वास से मुक्त, सहज और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया जाए ताकि लोग अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें।
इससे पहले अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की कथा पुस्तक सफल वस्तु का विमोचन किया। मदन व्यास ने आगंतुकों का आभार जताया। ज्योतिप्रकाश रंगा के मंच संचालन में साहित्यिक गरिमा और सहजता का संगम देखने को मिला।
लोकार्पण के अवसर पर शहर के गणमान्य नागरिक, साहित्यकार, शिक्षाविद और युवा वास्तु-रुचि रखने वाले बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
समारोह के अंत में आभार व्यक्त करते हुए आयोजकों ने कहा कि ‘सुफल वास्तु’ आने वाले समय में वास्तुशास्त्र की लोकप्रिय और मार्गदर्शक कृति साबित होगी।
