

जीवंत चित्रण की समृद्ध परंपरा है मथेरन कला
बीकानेर। सात दिवसीय उछब थरपन्ना के अवसर पर रविवार को लक्ष्मी नारायण रंगा सृजन सदन में एक कला संगोष्ठी का आयोजन एवं मथेरन कला के वरिष्ठ कलाकार चंद्र प्रकाश महात्मा का ेश्रीमती कमला देवी रंगा सृजन सम्मान प्रदत किया गया। गोष्ठी के विषय बीकानेर की परंपरागत मथेरन कला एवं ग्रंथ चित्रावली जैसे महत्वपूर्ण विषय पर वरिष्ठ कल विशेषज्ञ डॉक्टर राकेश किराडू ने अपने उद्बोधन में कहा कि बीकानेर की परंपरागत मथेरन कला विश्व विख्यात है। मथेरन कला बीकानेर स्थापना काल से ही चित्र कर्म करते हुए आए हैं यह एक जाति विशेष के कलाकार समाज में व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक समस्त संस्कारों पर बहुत ही भव्य चित्रण करते रहे हैं जिसमें चित्रित जन्म कुंडली, शादी विवाह के समय बनने वाले तोरण माया जी बागवाड़ी अंतिम संस्कार के समय बनने वाले गंगा जी के पगलिया आदि के चित्र सदैव ही बनते आए हैं।
संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि मथेरन कला ही नहीं एक जीवन दर्शन है जिसके माध्यम से व्यक्ति के 16 संस्कारों को भी समझा जा सकता है। ऐसी कला को और ऐसे कलाकारों को समाज द्वारा सम्मान देना सामाजिक दायित्व है। राजेश रंगा धर्मेंद्र छंगानी,भवानी सिंह ,मनमोहन पालीवाल, महेश पुरोहित, श्याम सुंदर किराडू ,सहित अनेक लोगों ने मथेरन कला को बीकानेर की कला पहचान बताईं
