

तीन भाषाओं की काव्यधारा ने बांधा समां
बीकानेर। प्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट की ओर से कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की जयंती के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय ‘सृजन सौरम-हमारे बाऊजी’ समारोह के दूसरे दिन साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान तीन कृतियों ‘सुमंगली माधवी’, ‘सदियों का सूरज’ एवं ‘भूत’ के चुनिंदा अंशों का वाचन किया गया। इन कृतियों का वाचन दयानंद शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार प्रमोद शर्मा एवं कासिम बीकानेरी ने किया। वाचन के माध्यम से कृतियों की साहित्यिक विशेषताओं, कथ्य और सृजनात्मक पक्षों को श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात ‘तीन भाषा-तीन रंग’ काव्य संध्या आयोजित हुई, जिसमें राजस्थानी, हिंदी एवं उर्दू भाषा के कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। विभिन्न भाषाओं की काव्य अभिव्यक्तियों ने समारोह को साहित्यिक विविधता और सांस्कृतिक सौहार्द के रंगों से सराबोर किया। काव्य संध्या की अध्यक्षता डॉ. उमाकांत गुप्त ने की। इस अवसर पर कमल रंगा, वली गौरी, सागर सिद्दीकी एवं मोहम्मद मोईनुद्दीन मुईन सहित अन्य साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। वक्ताओं ने लक्ष्मीनारायण रंगा के साहित्यिक अवदान एवं उनके व्यक्तित्व-कृतित्व का स्मरण करते हुए ऐसे आयोजनों को साहित्यिक परंपरा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
