

चातुर्मास में शुरू की गई ज्ञान आराधना जारी रखे
बीकानेर। मुनि कमलकुमार ने कहा कि चौमासी चर्तुदशी है , समग्र जैन समाज में इसका बहुत बड़ा महत्त्व है। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष तीन चौमासी चर्तुदशीआती है। उनमें फाल्गुन शुक्ला चर्तुदशी, आषाढ़ शुक्ला चर्तुदशी, कार्तिक शुक्ला चर्तुदशी तीनों का अपना-अपना महत्व है। फाल्गुन शुक्ला चर्तुदशी मुनि अपनी इच्छा से कहीं भी मना सकते हैं परंतु आषाढ़ शुक्ला चर्तुदशी तेरापंथ समाज में गुरु आज्ञानुसार ही मनाते हैं,क्योंकि चातुर्मास प्रारंभ होता है। कार्तिक शुक्ला चर्तुदशी आते ही पूरे जैन समाज में स्थविर व रुग्ण साधु – साध्वियों के अलावा सभी साधु – साध्वियों का विहार तय हो जाता है । तेरापंथ समाज में साधु – साध्वियों का विहार गुरु आज्ञानुसार होता है। चर्तुदशी पर काफी लोग उपवास व पौषध करते हैं तथा अनेक प्रकार के त्याग प्रत्याख्यान करके लोग अपने जीवन को साधनामय बनाते है।
