

पर्युषण महापर्व पर जैन दर्शन और आत्मशुद्धि का संदेश
बीकानेर। पर्युषण महापर्व के अवसर पर साध्वी कल्पयशा, साध्वी रश्मिप्रभा, साध्वी समन्वयप्रभा एवं साध्वी निश्चयप्रभा ने जैन दर्शन, कालचक्र और आत्मशुद्धि के महत्व पर विचार व्यक्त किए। साध्वियों ने कहा कि जैन दर्शन के अनुसार यह संसार अनादि और अनंत है। यह संसार था, है और रहेगा। जैन दर्शन में कालचक्र को दो भागों में विभाजित किया गया है, जिनमें छह अवसर्पिणी और छह उत्सर्पिणी काल होते हैं। वर्तमान में अवसर्पिणी काल का पांचवां आरा चल रहा है, जो निरंतर ह्रास की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने पर्युषण महापर्व को आत्मचिंतन, संयम और साधना का पर्व बताते हुए अधिक से अधिक धार्मिक क्रियाओं में सहभागिता का आह्वान किया। इस अवसर पर नवरतन बोथरा ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक सामायिक, जाप एवं पौषध करने का लक्ष्य रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण अवसर है।
