

साधिका कौशल्या देवी की स्मृति सभा आयोजित, साध्वी मंडल ने जीवन साधना को किया नमन
बीकानेर। संथारा साधिका कौशल्या देवी ने 15 दिनों तक तिविहार संथारा तथा 8 दिनों तक चोविहार संथारा की साधना कर संयम, आस्था और दृढ़ मनोबल का परिचय दिया। उनकी स्मृति में आयोजित सभा में साध्वी मंडल एवं श्रद्धालुओं ने उनके जीवन एवं साधना को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। साध्वी त्रिशला कुमारी ने कहा कि हमें मनुष्य का भव मिला है, जो आत्मकल्याण और भगवान बनने की साधना का अवसर है। कौशल्या देवी के जीवन में इस भावना का स्पष्ट रूप से परिलक्षण होता था। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को एकांत में बैठकर अपने विचारों पर चिंतन एवं मनन करना चाहिए। स्मृति सभा को संबोधित करते हुए साध्वी कल्पयशा ने कहा कि संथारा साधिका कौशल्या देवी का जीवन दृढ़ मनोबल और अटूट आस्था का संगम था। उन्होंने सर्वांगीण जीवन जिया और मृत्यु को भी महोत्सव के रूप में स्वीकार किया। इस अवसर पर साध्वी रश्मिप्रभा ने भावपूर्ण गीतिका का संगान किया। नवरतन बोथरा ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कौशल्या देवी के जीवन एवं साधना को अनुकरणीय बताया। सभा में जतनलाल संचेती, लूणकरण छाजेड़, देवेंद्र डागा, प्रेम बोथरा, मनोज छाजेड़, नारायण चोपड़ा, किशन बैद सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
