

समुद्र मंथन प्रसंग के साथ श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धा का सागर
बीकानेर। दाऊजी रोड स्थित श्री आदि गणेश मंदिर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति, धर्म और जीवन मूल्यों से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों का रसपान किया। कथा वाचक पंडित सुनील व्यास ने विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भक्तों को आध्यात्मिक जीवन का संदेश दिया। अपने प्रवचन में पंडित व्यास ने कहा कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम, समर्पण और निष्काम भक्ति से प्रसन्न होते हैं। सच्चा भक्त वही है जो अहंकार, छल और कपट से दूर रहकर प्रभु का स्मरण करता है तथा अपने जीवन को सद्गुणों से परिपूर्ण बनाता है। उन्होंने समुद्र मंथन के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन से विष और अमृत दोनों प्राप्त हुए थे, उसी प्रकार प्रत्येक मनुष्य के भीतर भी सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के विचार विद्यमान रहते हैं। जब व्यक्ति अपने मन का मंथन करता है, तभी उसे सही और गलत की पहचान होती है तथा जीवन में श्रेष्ठ मार्ग का चयन करने की प्रेरणा मिलती है। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए। रामसा व्यास एवं उनकी भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भजनों की मधुर प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे और भक्ति में लीन होकर नृत्य करने लगे। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिन्होंने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक ऊर्जा एवं जीवनोपयोगी संदेशों का लाभ प्राप्त किया। श्रीमद्भागवत कथा के आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक एवं प्रेरणादायक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।
