

स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े पत्रकारों के योगदान को किया याद
बीकानेर। हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) की बीकानेर इकाई द्वारा विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पत्रकारिता के माध्यम से जनजागरण करने वाले और देश की आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने वाले पत्रकारों के परिवारों का सम्मान किया गया।
समारोह में स्वतंत्रता सेनानी एवं पत्रकार रहे शौकत उस्मानी, रघुवरदयाल गोयल, दाऊदयाल आचार्य, वैद्य मघाराम, रामनारायण शर्मा, मूलचंद पारीक, अंबालाल माथुर, शंभुदयाल सक्सेना और गंगादास कौशिक के परिवारों का अभिनंदन किया गया। इसके साथ ही वरिष्ठ पत्रकार नारायण दास रंगा को पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजीव हर्ष ने कहा कि पत्रकारिता में तथ्यों की शुद्धता और कानूनी पहलुओं की समझ अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पत्रकारों से जिम्मेदारी, निष्पक्षता और संतुलन के साथ कार्य करने का आह्वान किया। लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि पत्रकारिता आज नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। बदलते तकनीकी परिवेश में पत्रकारों को नई चुनौतियों के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को भी बनाए रखना होगा।
हेम शर्मा ने पत्रकार संगठनों के बीच एकजुटता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पत्रकार हितों की रक्षा और पेशेवर मजबूती के लिए साझा मंच पर कार्य करना समय की मांग है। शिवचरण शर्मा ने पुराने दौर की पत्रकारिता को याद करते हुए बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद पत्रकार समाचारों को संपादकों तक पहुंचाने के लिए कठिन परिश्रम करते थे। वहीं वरिष्ठ पत्रकार हरीश बी. शर्मा ने कहा कि वरिष्ठ और युवा पत्रकारों के बीच सतत संवाद बना रहना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी पत्रकारिता के मूल्यों, परंपराओं और दायित्वों को बेहतर ढंग से समझ सके।
जार के महासचिव विशाल स्वामी ने कहा कि संगठन पत्रकारों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में पत्रकारों के कौशल विकास एवं क्षमता संवर्धन के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका तथा वर्तमान समय में मीडिया की जिम्मेदारियों पर सार्थक चर्चा हुई। उपस्थित पत्रकारों ने हिन्दी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की गौरवपूर्ण यात्रा को याद करते हुए इसके मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
