

राजस्थानी भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत
बीकानेर। साहित्यकार कमल रंगा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्थानी भाषा के लिए संघर्षरत लोगों के लिए 12 मई 2026 का दिन ऐतिहासिक रहा। उन्होंने कहा कि देश के माननीय सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति विक्रमनाथ एवं न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए संविधान के अनुच्छेद 21ए, अनुच्छेद 29 एवं अनुच्छेद 350ए के आधार पर प्रदेश के राजकीय एवं निजी विद्यालयों में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में लागू करने के निर्देश दिए हैं। रंगा ने कहा कि इस ऐतिहासिक निर्णय से करोड़ों लोगों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से राजस्थानी भाषा और लोक संस्कृति के संरक्षण को मजबूती मिलेगी। साथ ही युवा पीढ़ी अपनी मातृभाषा से जुड़कर बेहतर शिक्षा ग्रहण कर सकेगी तथा युवाओं के लिए रोजगार की नई संभावनाएं भी विकसित होंगी।
