

कवि सम्मेलन व मुशायरा: साहित्यकारों ने रचनाओं से बांधा समां
बीकानेर। शायर हाफिज गुलाम रसूल शाद जामी की पुण्यतिथि के अवसर पर जामी उर्दू अकादमी द्वारा भव्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी, उर्दू और राजस्थानी भाषा के करीब दो दर्जन रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजेन्द्र जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि शाद जामी ने अपने प्रभावशाली कलाम से बीकानेर का नाम देशभर में रोशन किया। उन्होंने शाद जामी को एक महान शायर ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक भी बताया। जोशी ने कहा कि शाद जामी हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे और यही कारण है कि हर धर्म और समाज के लोगों में उन्हें अपार सम्मान प्राप्त था। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में शाद जामी के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी शायरी आज भी समाज को जोड़ने और इंसानियत का संदेश देने का कार्य कर रही है। इस अवसर पर डॉ. ज़िया उल हसन कादरी, असद अली असद, इमदादुल्लाह बासित, हुसैन जहीन, रवि शुक्ल, अमित गोस्वामी, मनीषा आर्य सोनी, मोनिका गौड़, डॉ. कृष्णा आचार्य, शकूर सिसोदिया, अमर जुनूनी, लीलाधर सोनी, विप्लव व्यास, बाबूलाल छंगाणी, जुगलकिशोर पुरोहित, राजाराम स्वर्णकार, अब्दुल जब्बार जज़्बी, जहीरुद्दीन, मुहम्मद यासीन, मुईनुद्दीन जामी सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से कार्यक्रम में समां बांध दिया। कार्यक्रम के अंत में जामी उर्दू अकादमी द्वारा सभी रचनाकारों का सम्मान किया गया। यह आयोजन न केवल शाद जामी को श्रद्धांजलि देने का माध्यम बना, बल्कि साहित्यिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का भी संदेश दे गया।
