Bikaner Bikaner District Rajasthan

भैंरू कुटिया में गुरुदेव स्वामी सत्यानंद सरस्वती (फागी बाई) का 39वां निर्वाण दिवस श्रद्धा से मनाया गया

सत्यानंद जी का समाज में नैतिक मूल्यों, प्रेम, करुणा और सदाचार की भावना जाग्रत करने का योगदान अविस्मरणीय
बीकानेर। गुरुदेव स्वामी सत्यानंद सरस्वती जी महाराज (फागी बाई) का 39वां निर्वाण दिवस रविवार को भैंरू कुटिया में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुबह से ही भक्तजन भैंरू कुटिया में एकत्र हुए और गुरुदेव की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। समाजसेवी बृजगोपाल जोशी ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित बटुक महाराज के सान्निध्य में हुआ, जिसमें विधिवत रूद्राभिषेक और पादुका पूजन संपन्न किया गया। इसके बाद भक्तों ने महाराज की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। जोशी ने बताया कि गुरुदेव स्वामी सत्यानंद सरस्वती जी ने अपना संपूर्ण जीवन सेवा, साधना और समाज कल्याण के लिए समर्पित किया था। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण में निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा, धर्म प्रचार और आध्यात्मिक उत्थान का कार्य किया। समाज में नैतिक मूल्यों, प्रेम, करुणा और सदाचार की भावना जाग्रत करने में उनका योगदान अविस्मरणीय रहा।
मेघातिथि जोशी ने कहा कि “गुरुदेव के उपदेश और जीवन आदर्श आज भी हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं। वे हमें जीवन में सत्य, सेवा और संयम को अपनाने की प्रेरणा देते हैं। उनके द्वारा दिखाया गया मार्ग आज भी समाज को एकता, नैतिकता और मानवता के पथ पर अग्रसर करता है।”
शशिशेखर जोशी ने कहा कि स्वामी जी की शिक्षाएं केवल आध्यात्मिक जीवन तक सीमित नहीं थीं, बल्कि उन्होंने समाज के हर वर्ग को और धर्म के सच्चे अर्थ को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।
इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार-कथाकार राजेन्द्र जोशी, गौरीशंकर आचार्य, उमाशंकर आचार्य, ध्रुवशेखर, मोहिनी देवी, राजस्थली, सुनीता और सप्त ़ऋषि मंडल के सदस्यगणों ने गुरुदेव की स्मृतियों को नमन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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