

गुरु और धर्म के प्रति अटूट आस्था रखे
बीकानेर। तेरापंथ भवन में तेरापंथी सभा गंगाशहर द्वारा आयोजित श्रावक सम्मेलन में बोलते हुए मुनि कमल कुमार जी स्वामी ने कहा कि जैन धर्म में अनुयायियों को श्रावकों की संज्ञा दी जाती है। श्रावक 4 तरह के होते हैं। 1. श्रद्धालु श्रावक 2. सम्यकत्वी श्रावक 3. बारह व्रती श्रावक 4.प्रतिमा धारी श्रावक। श्रावक में किसी भी प्रकार का व्यसन नही होना चाहिए। देव-गुरु-धर्म के प्रति गहरी आस्था होनी चाहिए। धर्म ध्यान आत्मा के लिए होना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राजेन्द्र सेठिया ने बताया कि श्रावक धर्म संघ और आचार्य के प्रति अपनी आस्था पुष्ट रखे। श्रावक अपने दायित्व के प्रति जागरूक रहे।
