

सरजूदासजी महाराज के 18 वर्षों के धूनी तप की हुई पूर्णाहुति
बीकानेर। संसार का कल्याण हो और सनातन धर्म आगे बढ़े इसी उद्देश्य से विगत 18 वर्ष धूनी तप किया और प्रभु श्रीराम से देश में खुशहाली की प्रार्थना की गई। यह उद्गार राष्ट्रीय संत श्रीसरजूदासजी महाराज ने रामझरोखा कैलाशधाम में गुरुवार को धूणी पूर्णाहुति के दौरान श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। महामंडलेश्वर श्री सरजूदासजी महाराज ने बताया कि परम पूज्य श्री सियाराम जी, परम पूज्य श्रीश्री 1008 महंत श्री रामदास जी महात्यागी जी गुरु महाराज का पूजन किया गया। गुरु वंदन, आरती, पूजन, हवन धूणी पूर्णाहुति एवं भंडारे का आयोजन किया गया। इससे पूर्व बुधवार को रामायण पाठ का आयोजन किया गया। संत-महात्माओं व श्रद्धालुओं ने भी भंडारे में भोजन-प्रसादी का आनन्द लिया। राष्ट्रीय संत श्री सरजूदासजी महाराज का द्वारा बसन्त पंचमी से गंगा दशहरे तक रोजाना तीन घंटे तक कोट खप्पड़ का अनुष्ठान विगत 18 वर्षों से किया जाता रहा है। लगातार चार माह तक चलने वाले इस तप की अवधि 18 वर्ष होती है। साधना में मूल रूप से राम नाम के मंत्र का जप किया जाता है। यह तप स्वयं के लिए नहीं बल्कि संसार कल्याण के लिए होता है। खास बात यह है कि इस बार महाकुंभ प्रयागराज अखाड़े के दौरान भी श्री सरजूदास जी महाराज ने संगम तट के समीप कोटधुनी तप किया। यह तप साधना त्यागी संतों द्वारा सदियों से निभाई जा रही है और आज भी वैष्णव संतों द्वारा जीवंत रखी गई है।
