

बीकानेर मूरत तो मिट जाय पण कीरत कहीजती जाय…….के माध्यम से व्यक्ति की सुन्दरता से अधिक महत्वपूर्ण उसका कर्म होता है जैसे संदेश को अपनी बातपोशी की कला में बहुत मधुरता से पिरोते हुए राजस्थान के प्रसिद्ध प्रेम-प्रसंग ‘मूमल अर महेन्द्र री बात’ की प्रस्तुति से श्री हरिवल्लभ बोहरा ने आगंतुकों का मन मोह लिया। अवसर था – लोकअध्येता कीर्तिशेष डॉ.श्रीलाल मोहता की पावन स्मृति में परम्परा, बीकानेर, प्रज्ञा परिवृत्त, बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति और उरमूल सीमांत समिति, बज्जू के सह-आयोजन में स्थानीय प्रौढ़ शिक्षा भवन सभागार में आयोजित ‘कला-सृजनमाला’ के तहत मुख्य अतिथि जैसलमेर के हरिवल्लभ बोहरा, सेवानिवृत्त, प्रधानाचार्य की विशिष्ट बातपोशी-कला में ‘मूमल-महेन्द्र री बात’ की प्रस्तुति का। इस अवसर पर अतिथि कलाकारों का शॉल, साफा, स्मृतिचिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।
जागता रैई जो, जागता रैई जो, अर हंुकारों देता रैईजो….और हाले नीं ऐ मूमल थने अमरकोट ले जाऊं…..जैसी मधुर उक्तियों के साथ श्रीबोहरा ने अपनी विशिष्ट बातपोशी शैली में और हंुकारियों के हुुंकारों के साथ लोद्रवा की राजकुमारी मूमल और अमरकोट के राणा महेन्द्र, तिलिस्म से भरी मूमल की मेड़ी, शिख-नख श्रृंगार, आखेट कला, पाककला, घोड़ों का लवाजमा आदि का राजस्थानी गद्य और पद्य में इस प्रकार से भावपूर्ण वर्णन किया की पूरे कथानक को सजीव बना दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में साहित्यकार मधु आचार्य ने कहा कि बातपोशी मूल रूप में हमारे राजस्थान की ही कला है। आज इसके संरक्षण और शोध की महती आवश्यकता है। लोक तो हमारी संस्कृति की आत्मा है और लोक में तो हर सवाल का उत्तर व्याप्त है। डॉ. श्रीलाल मोहता ने जिस तरह से निःस्वार्थ भाव से लोक के विविध आयामों को मंच दिया, बीज रूप में संरक्षित करने का कार्य किया वह अद्वितीय और बेजोड़ है।
प्रारंभ में संस्था सचिव सुशीला ओझा ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि श्रीबोहरा को बहुविध व्यक्तित्व का धनी है। इसके साथ ही उन्होंने बीकानेर में तीन दशक पहले और जैसलमेर में गत वर्ष हुए बातपोशी कार्यक्रमों के अनुभव भी अभिव्यक्त किए।
संस्था परिवार के डॉ. ब्रजरतन जोशी ने कला सृजनमाला की पृष्ठभाव एवं अबतक के आयोजनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले चालीस वर्षों में बीकानेर में हुए साहित्य एवं कलाजगत से जुड़े कार्यों एवं आयोजनों में कीर्तिशेष डॉ.श्रीलाल मोहता का उल्लेखनीय अवदान हम सबको प्रेरणा देता रहेगा।
आगंतुकांे के प्रति आभार व्यक्त करते हुए एडवोकेट गिरिराज मोहता ने लोककलाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन के प्रति जिम्मेदारी निभाने की आवश्यकता पर बल दिया।
शहर के प्रबुद्ध एवं गणमान्य लोगों की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को सार्थकता प्रदान की।
