

रफीक सागर की स्मृति में संगीत सभा
बीकानेर। संगीत कला केंद्र संस्थान द्वारा टी एम ऑडिटोरियम में भजन गायक रफीक सागर की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि लेखक अशफ़ाक कादरी ने कहा कि रफीक सागर बहुआयामी संगीतज्ञ ओर लोकप्रिय कलाकार थे जिन्होंने पांच दशकों तक संगीत साधन की। कादरी ने कहा कि स्व सागर ने साहित्यिक रचनाओं को संगीतबद्ध कर नया आयाम दिया। कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. सुजीत देवघरिया ने वायलिन पर राग भूप में मध्य रचना प्रस्तुत कर अपनी स्वरांजलि दी। प्रो देवघरिया ने भजन वैष्णव जन तो तेने कहिए पीर पराई जाने रे तथा श्री रामचंद्र कृपालु भज मन प्रस्तुत कर भाव विभोर किया। कार्यक्रम में भगवती गोस्वामी, मनोहरी स्वामी, लक्ष्मी और सुनीता ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। पुखराज शर्मा ने सागर द्वारा रचित गजल, मेरे लिए जो सोच है वैसा नहीं हूं मैं अच्छा नहीं हूं माना बुरा भी नहीं हूं प्रस्तुत कर भाव विभोर कर दिया। तबला संगत उस्ताद गुलाम हुसैन ने की। इस मौके पर कमल श्रीमाली, मोहमद ज़फ़र डग्गा, चन्द्रशेखर सांवरिया, गौरी शंकर सोनी ने सागर के व्यकित्व कृतित्व पर तथा संगीत योगदान पर विनम्र श्रद्धांजलि दी।
