

प्रज्ञा-सम्मान डॉ. सैनी, जांगिड़ एवं हर्ष को अर्पित
बीकानेर। साहित्यकार, चिंतक, रंगकर्मी एवं शिक्षाविद् कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की दूसरी पुण्यतिथि पर प्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट द्वारा आयोजित चार दिवसीय ‘सृजन सौरम-हमारे बाऊजी’ समारोह के अन्तिम दिन सोमवार द्वितीय राज्य स्तरीय लक्ष्मीनारायण रंगा प्रज्ञा सम्मान का आयोजन लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन में आयोजित हुआ।
राज्य स्तरीय लक्ष्मीनारायण रंगा प्रज्ञा सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ इतिहासविद् डॉ. भंवर भादाणी ने कहा कि स्व. लक्ष्मीनारायण रंगा कि समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को जन-जन तक ले जाने के साथ विशेष तौर से नई पीढ़ी उनके विराट व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा ले पाएं, इसी महत्वपूर्ण सोच के साथ राज्य स्तरीय प्रज्ञा सम्मान अपने आप में एक नवाचार तो है ही साथ ही बीकानेर के गौरव क्षण भी है।
समारोह के मुख्य अतिथि संभाग जिला परिवहन अधिकारी अनिल पण्ड्या ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्व. रंगा ने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण प्रसंगों को समकालीन संदर्भो में पाठकों तक पहुंचाया। उन्होने साहित्य, रंगकर्म एवं शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सृजनात्मक-संवेदनात्मक ऊर्जा के साथ महत्वपूर्ण अवदान दिया।
समारोह के विशिष्टि अतिथि महाराज गंगासिंह विश्वविद्यालय के अतिरिक्त कुल सचिव डॉ. बिट्ठल बिस्सा ने कहा कि स्व. रंगा के विराट व्यक्तित्व और कृतित्व से नई पीढी को प्रेरणा लेकर उनकी समृद्ध साहित्यिक एवं कला परंपरा को आगे ले जाना होगा। समारेह में संजय सांखला ने समारोह को एक नवाचार बताया।
‘सृजन सौरम-हमारे बाऊजी’ के संयोजक वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने अपने पिताश्री के बारे में बताते हुए कहा कि उनकी सृजन यात्रा 1947 से प्रारंभ हुई। प्रज्ञा सम्मान से सम्मानित होने वाली साहित्य क्षेत्र की विभूति चिड़ावा के वरिष्ठ साहित्यकार श्याम जांगिड़ की समृद्ध साहित्यिक यात्रा को रेखांकित करते हुए उनके सम्मान-पत्र का वाचन डॉ. कृष्णा आचार्य ने किया। प्रज्ञा सम्मान डॉ. सैनी, जांगिड़ एवं हर्ष को समारोह के अध्यक्ष, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि को कमल रंगा एवं राजेश रंगा द्वारा माला अर्पण, श्रीफल, शॉल, सम्मान-पत्र आदि अर्पित किया गया।
