


बीकानेर। समाज में जब महिलाओं की सक्रियता बढ़ेगी तब ही वें वास्तविक रूप में सशक्त होंगी और शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सहकार महिला सशक्तिकरण के प्रमुख आधार है। यह सानिध्य उद्बोधन शिक्षाविद बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति की सचिव सुशीला ओझा ने जन शिक्षण संस्थान बीकानेर द्वारा आयोजित महिला सम्मेलन में अभिव्यक्त किये। उन्होंने कहा कि महिला विकास में कौशल विकास से आर्थिक विकास की नई दिशाएं जुड़ गई है। एक समय था जब महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। मुख्य अतिथि उप तहसीलदार सुरेंद्र पाल ने कहा कि महिलाएं अब पुरुषों से कहीं भी कम नहीं है। वर्तमान समय में महिलाएं आगे बढ़ रही है और अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो रही है। आपने संस्थान की गतिविधियों की सराहना भी की ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जन शिक्षण संस्थान बीकानेर के अध्यक्ष एडवोकेट गिरिराज मोहता ने कहा कि आज के दिन मात्र ही नहीं नहीं बल्कि हमें तो सदैव महिलाओं की कार्य विशेषता और उनके जज्बे का सम्मान करना चाहिए।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि प्रबंध मंडल की सदस्य डॉ दीपाली धवन ने कहा कि तकनीकी युग में महिलाओं को आगे बढ़ने में आसानी हो रही है, वहीं महिलाएं अपने काम के माध्यम से पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चलने लगी है। संस्थान के निदेशक ओमप्रकाश सुथार ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि महिलाओं का अपनी पहचान बनाना है वास्तविक रूप में महिला दिवस मनाना है। संस्थान के कार्यक्रम अधिकारी महेश उपाध्याय ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा आज की महिला चेतना सम्मेलन में महिलाओं का उत्साह देखकर विश्वास सकता है कि कौशल विकास के क्षेत्र आने वाले समय में महिलाएं आगे बढ़कर काम करेंगी। इस कार्यक्रम के आरंभ में संस्थान द्वारा मेहंदी प्रतियोगिता और रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। मेहंदी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान ममता, दूसरा स्थान कुसुम, तीसरा स्थान पूजा, चौथा किरण और पांचवा स्थान निर्मल को मिला। इसी प्रकार रंगोली प्रतियोगिता में पहला स्थान हिमांशी, दूसरा निशा, तीसरा किरण, चौथा ज्योति और पांचवा शीतल के समूह को मिला। कार्यक्रम में सहायक कार्यक्रम अधिकारी उमाशंकर आचार्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संस्थान के सहायक कार्यक्रम अधिकारी तलत रियाज, लक्ष्मी नारायण चूरा, विष्णुदत्त मारू का सराहनीय सहयोग रहा। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुष्पलता, सुनीता शर्मा, मंजू आचार्य और द्वारिका आदि मौजूद थे। संस्थान के संदर्भ व्यक्तियों में द्रौपदी, बीरबल, प्रेमलता, पुष्पा, राधा, भावना, पूनम, अन्नपूर्णा, प्रियंका आदि का सहयोग रहा।
