

महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती पर वेद मंत्रों से दी आहुतियां
बीकानेर। रविवार को नगर आर्यसमाज, महर्षि दयानन्द मार्ग, बीकानेर में महर्षि दयानन्द सरस्वती की 201वीं जयंती पर गोवर्धन गायत्री दम्पति के यज्ञमानत्व तथा डॉ. केसरमल जी के ब्रह्मत्व में वेदमंत्रो से आहुतियां दी गयी। श्रीमती कंचन, पुष्पा, गायत्री, रूपा, निर्मला, कुसुम आदि ने महर्षि के जीवन वृत्तांत की भजन के माध्यम से प्रस्तुति दी. डॉ. केसर मल, ऑसिस्टेंट प्रोफेसर (संस्कृत), डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर ने अपने उद्बोधन में कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती समग्र क्रांति और स्वंतत्रता के पुरोधा थे जिनकी प्रेरणा से सैकड़ो व्यक्तियों ने हंसते हंसते देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। सतश्रुत उपाध्याय ने अपने उद्बोधन में कहा कि महर्षि आप्त पुरुष थे. उन्होंने वेदों की और लौटो का नारा देते हुए इनका प्रचार प्रसार किया और उनका हिंदी में भाष्य किया। महेश आर्य ने कहा कि महर्षि ने सत्यार्थ प्रकाश रूपी अमूल्य रत्न की रचना कि जिसमे सभी धर्मो पर सत्यासत्य रूप से प्रकाश डालते हुए वेद और वेदों द्वारा प्रतिपदित व्यवस्था का मार्गदर्शन किया है। इस अवसर पर डॉ. सतीश, पूर्णाराम आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
