

वंदे गंगा, जल संरक्षण जन अभियानः मीडिया राउंड टेबल संगोष्ठी’ आयोजित
बीकानेर। ’वंदे गंगा, जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत शनिवार को मीडिया राउंड टेबल संगोष्ठी आयोजित हुई। इस दौरान विभिन्न मीडिया प्रतिनिधियों ने जल संरक्षण से जुड़े सुझाव दिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. कमलेश शर्मा थे। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने अनेक तालाब, कुएं और बावड़ियां आदि बनवाए। इन्हें संरक्षित रखना आज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके मद्देनजर जन-जागरूकता के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर 15 दिवसीय ’वंदे गंगा, जल संरक्षण जन अभियान’ चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य आमजन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना और परम्परागत जल स्रोतों का संरक्षण करना है। इसमें मीडिया प्रतिनिधियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण का विचार जन जन तक पहुंचे, यह आज की आवश्यकता है।
जिला क्षय रोग निवारण अधिकारी डॉ. चन्द्र शेखर मोदी ने कहा कि जल की एक-एक बूंद को संरक्षित करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कैच द रैन’ अवधारणा के बारे में बताया और कहा कि मरुस्थल के लोग पानी का मोल समझते हैं। ऐसे अभियान इस उद्देश्य की पूर्ति में सहायक सिद्ध होंगे। जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक डॉ. हरि शंकर आचार्य ने अभियान के तहत पंद्रह दिनों में होने वाली गतिविधियों के बारे में बताया।
विमल छंगाणी ने बताया कि बीकानेर 538 वर्ष पुराना ऐतिहासिक शहर है। यहां के कुएं, तालाब और तलाईयां यहां की धरोहर है। इन पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण तथा इन्हें अतिक्रमण मुक्त करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तालाबों का संरक्षण और सौंदर्यकरण कर जल संरक्षण के साथ नाइट टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने सरकार के इस अभियान की सराहना की।
जितेंद्र व्यास ने कहा कि शहरी क्षेत्र के सभी 56 ऐतिहासिक कुओं को पुनः प्रारंभ करने की दिशा में कार्य किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यहां के गांवों के नाम के पीछे जुड़ा हुआ ’सर’ इनके आसपास ऐसे तालाब और पोखर होने की जानकारी देता है, जो कभी उस क्षेत्र के जल आवश्यकता की पूर्ति करते थे।
जनसंपर्क अधिकारी सुरेश बिश्नोई ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालनी गोपाल जोशी ने किया। संगोष्ठी के दौरान नागौर के सहायक जनसंपर्क अधिकारी अजीत चौधरी सहित विभिन्न पत्रकार मौजूद रहे।
