

वंशावली लेखन परंपरा के संरक्षण हेतु देशनोक में राष्ट्रीय बैठक आयोजित
बीकानेर। अखिल भारतीय वंशावली संरक्षण एवं संवर्धन संस्थान द्वारा देशनोक में दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में देशभर से आए पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने वंशावली लेखन की प्राचीन परंपरा के संरक्षण, संवर्धन एवं इसके महत्व पर विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष परमेश्वर ब्रह्मभट ने कहा कि अखिल भारतीय वंशावली संरक्षण एवं संवर्धन संस्थान देशभर में वंशावली लेखन की गौरवशाली परंपरा को संरक्षित एवं सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा भारतीय संस्कृति और इतिहास की अमूल्य धरोहर है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। संस्थान के राष्ट्रीय संरक्षक एवं धर्म जागरण समन्वय के राष्ट्रीय सह-प्रमुख अरुणकांत ने कहा कि भारतीय सभ्यता में वंशावली का विशेष महत्व रहा है। प्राचीन काल से ही विभिन्न क्षेत्रों में भाट, राव, जागा, बड़वा तथा अन्य वंशावली लेखक परिवारों के इतिहास, सामाजिक परंपराओं और पीढ़ियों का विस्तृत लेखा-जोखा सुरक्षित रखते आए हैं। यह परंपरा समाज को उसकी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करती है। संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री बाबूलाल भाट ने बताया कि देशनोक में आयोजित इस अखिल भारतीय बैठक में देश के 10 प्रांतों से 46 पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में वंशावली परंपरा के संरक्षण, आधुनिक समय में इसके दस्तावेजीकरण तथा युवाओं को इस परंपरा से जोड़ने के विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
रने का संकल्प लिया।
