

पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की पुण्यतिथि पर मांड लोकगीतों की विरासत पर हुई चर्चा
बीकानेर। मांड कोकिला पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की पुण्यतिथि पर उनके मांड लोकगीतों और संगीत विरासत को लेकर चर्चा का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने जिलाई बाई के योगदान को याद करते हुए उनकी स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने तथा मांड लोकगीतों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. अजीज अहमद सुलेमानी ने कहा कि अल्लाह जिलाई बाई राजस्थान के लोकसंगीत के प्रति समर्पित ऐसी कलाकार थीं, जिनके गायन में मानवीय संवेदनाओं की गहरी अभिव्यक्ति देखने को मिलती थी। मुख्य वक्ता शबनम अजीज ने कहा कि जिलाई बाई के गीतों में नारी मन की भावनाओं और संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति है। उनके गीत राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कार्यक्रम में राजाराम स्वर्णकार, अशफाक कादरी, डॉ. हनुमान सिंह कस्वां, डॉ. एस.एन. हर्ष, डॉ. बाघ सिंह, डॉ. एम.एम. बागड़ी, डॉ. धनपत कोचर, रजिया बेगम, अयाज अजीज, माही अयाज एवं अब्दुल वाहिद सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
