

पुण्यों का संचय व पापों का विसर्जन करें
बीकानेर। रांगड़ी चौक के श्री सुगनजी महाराज के उपासरे में चातुर्मासिक प्रवचन में मंगलवार को गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने कहा कि पुण्य से मनुष्य जीवन, उसमें उच्च कोटि का कुल, परमात्मा के श्रद्धा और शास्त्रों का श्रवण करने तथा परमात्मा की आज्ञा के अनुसार जीवन जीने का सुयोग्य मिला है। परमात्मा की कृपा व पुण्य से मिले इस सुयोग्य का समता के साथ सदुपयोग करें। पुण्यों का संचय व पापों का विसर्जन करें।
उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री की पत्नी के साथ हाल ही हुई घटना का स्मरण दिलाते हुए कहा कि पुण्य समाप्त होने पर उनको आतताइयों के हाथों काल का ग्रास बनना पड़ा। पुण्याधिपुण्य से मिली सुख सुविधाओं, वैभव के दौरान पुण्य कर्मों का संचय करें तथा पाप से बचे। समय का चक्र चलने पर समता की साधना के साथ धर्म प्रवृति में लगे रहे।
