

पुण्यों का संचय करें, पापों व कषायों का विसर्जन करें
बीकानेर। ढढ्ढा चौक क्षेत्र की ढढ्ढा कोटड़ी में मंगलवार को गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिन मणि प्रभ सूरीश्वरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती गणिवर्य श्री मेहुल प्रभ सागर म.सा., प्रवचन में कहा कि पुण्यों का संचय तथा पापों व कषायों का विसर्जन करें। जीवन में धीरज, धर्म बढ़ावें तथा समता भावना के साथ परमात्मा, जिनवाणी व सच्चे गुरु के प्रति श्रद्धा व विश्वास रखे। संसार असार तथा एक स्वप्न जैसा है, जो एक समय के बाद खत्म हो जाता है।
उन्होंने कहा कि त्रियंच (जीव-जंतु), मनुष्य व देव गति में भी पूर्ण सुख नहीं है। पूर्ण सुख आत्म-परमात्मा के मिलन व मोक्ष में है। मनुष्य शरीर व्याधि का मंदिर तथा संसार सागर दुखालय है। संसार तथा भव सागर से पार उतरने, 84 लाख योनियों के चक्रव्यूह से बचने के लिए परमात्म वाणी का आलम्बन लें।
