

मलंग फोक फाउंडेशन ने वैश्विक मंच पर उठाए लोक कलाकारों के अधिकारों के मुद्दे
बीकानेर। राजस्थान की समृद्ध लोक संगीत परंपराओं और सामुदायिक सांस्कृतिक पहलों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिनिधित्व देते हुए मलंग फोक फाउंडेशन के गोपाल सिंह चौहान ने स्पेन के लास पालमास दे ग्रान कैनारिया में आयोजित विश्व संगीत सम्मेलन एवं एक्सपो में भागीदारी की। इस दौरान उन्होंने वैश्विक संगीत उद्योग में लोक कलाकारों की पहचान, सांस्कृतिक अधिकारों, आर्थिक न्याय और स्वतंत्र सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़ी चुनौतियों पर अपने विचार रखे। चौहान ने कहा कि लोक संगीत केवल मंच पर प्रस्तुत की जाने वाली कला नहीं है, बल्कि यह समुदायों की स्मृतियों, जीवन-दर्शन, भाषाओं और सांस्कृतिक अस्मिता का जीवंत हिस्सा है। लोक संगीत परंपराओं के संरक्षण और लोक कलाकारों को उचित पहचान एवं सम्मान दिलाने के लिए आवश्यक है कि उन्हें वैश्विक संगीत उद्योग में समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं। सम्मेलन के दौरान ‘वैश्विक संगीत और सांस्कृतिक पहचान की चुनौतियां’ विषय पर आयोजित राउंडटेबल मेंटरिंग सत्र में चौहान ने विभिन्न देशों से आए कलाकारों, संगीत प्रबंधकों, बुकिंग एजेंटों और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। इस सत्र में एशिया, अफ्रीका, यूरोप, कैरेबियन सहित विभिन्न क्षेत्रों के 14 प्रतिनिधियों और मेंटर्स ने भाग लिया। इस अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के माध्यम से राजस्थान की लोक संगीत परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक पहलों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला। साथ ही, लोक कलाकारों के अधिकारों, उनकी आर्थिक स्थिति और स्वतंत्र सांस्कृतिक आयोजनों की चुनौतियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विचार-विमर्श हुआ।
