

रंगा मानवीय संवेदना के कुशल चित्तेरे थे
बीकानेर। साहित्यकार कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की जयंती के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय ‘सृजन सौरम-हमारे बाऊजी’ समारोह का आगाज़ उनके व्यक्तित्व और कृत्तित्व-पुष्पांजलि के साथ उनकी प्रतिनिधि चर्चित कविताओं का भारतीय भाषाओं में अनुवाद वाचन के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. उमाकांत गुप्त ने कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा प्रयोगधर्मी रचनाकार थे। उनका सम्पूर्ण सृजन एवं साहित्य जो कि विभिन्न साहित्यिक विधाओं के माध्यम से गंभीर दार्शनिक पृष्ठभूमि का है। आपका सृजन वर्तमान है, इतिहास नहीं। मुख्य अतिथि बुलाकी शर्मा ने कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा मानवीय संवेदना के कुशल चित्तेरे थे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी रंगा न केवल साहित्यकार थे, अपितु रंगकर्मी, रंगनिर्देशक, नृत्तक, एवं संगीतज्ञ भी थे। कमल रंगा ने लक्ष्मीनारायण रंगा के विपुल, समग्र-साहित्य को समाज की सभी महत्वपूर्ण समस्याओं और स्थितियों के साथ मानवीय चरित्र और मानवीय संबंधों की सूक्ष्म जटिलता को व्यक्त करने वाला बताया। राजेश रंगा ने समारोह के महत्व को रेखांकित करते हुए लक्ष्मीनारायण रंगा से जुड़े कुछ संस्मरण साझा किए।
