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स्वदेशी पशुधन संरक्षण विषय पर दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ

स्वदेशी पशुधन संरक्षण विषय पर दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ
बीकानेर। पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, बीकानेर के कुक्कुट विज्ञान विभाग द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान, नई दिल्ली द्वारा वित्त पोषित “सतत् कृषि एवं देशी पशुधन संरक्षणः सुरक्षित भविष्य का आधार“ विषय पर 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम गुरुवार को प्रारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु डॉ. सुमन्त व्यास ने बताया कि वर्तमान समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढीकरण के लिए टिकाऊ पशुपालन की अतिआवश्यकता है, जिसके लिए हमारा स्वदेशी पशुधन एक उपयुक्त संसाधन है। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने आने वाली पीढ़ीयों को स्वदेशी पशुधन के संरक्षण के साथ-साथ इनके संवर्धन करने के लिए प्रेरित करते हुए इस दिशा में कार्य कर रहे पशुपालकों एवं संस्थाओं की सराहना की। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने बताया कि इस पाठ्यक्रम से शिक्षाविदों एवं वैज्ञानिकों को देशी पशुधन के संरक्षण के विभिन्न आयामों को जानने एवं समझने तथा विशेषज्ञता विकसित करने में मदद मिलेगी। अधिष्ठाता वेटरनरी महाविद्यालय बीकानेर प्रो. बी.एन. श्रृंगी ने अपने स्वागत उद्बोधन में राज्य की देशी गोवंश नस्लों की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इन पशुधन की महत्वपूर्ण भूमिका को बताया। कार्यक्रम के दौरान शोर्ट कोर्स के निदेशक, सहायक आचार्य डॉ. अरूण कुमार झीरवाल ने दस दिवसीय कोर्स की रुपरेखा से देश के विभिन्न राज्यों से आये 18 प्रतिभागियों को अवगत करवाया। कार्यक्रम में निदेशक प्रसार शिक्षा, राजुवास प्रो. राजेश कुमार धूड़िया, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. पंकज कुमार थानवी, निदेशक कार्य (भू संपदा) डॉ. नरेन्द्र सिंह सहित विश्वविद्यालय की फेक्लटी एवं शोर्ट कोर्स के प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन कोर्स के समन्वयक डॉ. अमित चौधरी ने किया।

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