

सहिष्णुता के अभाव में घर बिखरते हैं
बीकानेर। तेरापंथ भवन में मुनि कमलकुमार ने कहा कि धर्म आश्वास है विश्वास है शीतघर के समान है माता पिता तुल्य संरक्षण देने वाला है। इस संघ में केवल वक्ता लेखक गायक चिन्तक मनस्वी कलाकारों युवाओं की ही नहीं बाल वृद्ध रुग्ण ग्लान सबकी समुचित सार संभाल की जाती है। संघ का एक एक व्यक्ति आचार्य की दृष्टि का हृदय से पालन करता है आचार्य भी प्रत्येक व्यक्ति को चित्त समाधि प्रदान करते हैं जिससे उनका संयम जीवन उत्तरोत्तर विकासोन्मुख हो।
