

15 दिवसीय उपवास की पूर्णाहुति पर आयोजित हुआ समारोह
बीकानेर। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में बोथरा भवन में तपस्वी अरिहंत पुगलिया के अभिनंदन में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह समारोह मुनि अमृत कुमार के सान्निध्य में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया।
यह अभिनंदन समारोह अरिहंत पुगलिया द्वारा किए गए 15 दिवसीय निराहार उपवास एवं 32 भक्त प्रत्याख्यान (आगमिक तप) की पूर्णाहुति के उपलक्ष्य में रखा गया। इस दौरान उन्होंने निरंतर संयम, साधना और आत्मशुद्धि का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। मुनि अमृत कुमार ने अपने प्रवचन में तपस्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तप आत्मा की शुद्धि का प्रभावी माध्यम है। मुनि वृंदों ने तप के साथ-साथ दैनिक जीवन में अहिंसा, संयम और सदाचार के पालन पर विशेष बल दिया। इस अवसर पर जतनलाल संचेती ने कहा कि तपस्या कर्म निर्जरा का सबसे शक्तिशाली साधन है, जिससे आत्मा उज्जवल, पवित्र और कर्मबंधन से मुक्त होती है कार्यक्रम में नवरतन बोथरा, देवेन्द्र डागा सहित समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। समारोह का वातावरण श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।
