

सनातन संस्कृति में शिव तत्व मानवताव का कल्याण करने में निरत है
बीकानेर। ब्रह्मलीन श्रीस्वामी संवित् सोमगिरिजी महाराज की पावन स्मृति में श्रीलालेश्वर महादेव मंदिर में अधिष्ठाता पूज्य स्वामी विमर्शानंदगिरि जी महाराज के सान्निध्य में श्री शिव महापुराण कथा के सप्तम दिवस पर कथा का समापन हो गया। इस अवसर पर आचार्य राजेन्द्र जोशी जी ने सत्र रूद्र संहिता, कोटि रूद्र संहिता, उमा रूद्र संहिता और वायविय संहिता पर प्रकाश डाला गया। जिसमें भगवान् शिव के ज्योर्तिलिंगों की उत्पति, उनके महात्म्य उत्पति सहित नंदीश्वर अवतार पर भी प्रकाश डाला गया।
पूज्य स्वामी श्री विमर्शानंदगिरि जी महाराज ने अपने आशीवर्चन में कहा कि हम प्रतिदिन जाने-अनजाने में कुछ न कुछ ऐसी त्रुटि, ऐसी गलती करते हैं, जिसे कि मानवीय भूल कहा जा सकता है, लेकिन हम सर्वशक्तिमान भगवती के चरणों में यदि अपने क्षमायाचना करते हैं, तो वह भगवती भविष्य में हमें मार्गदर्शन भी करती है और हमें होने वाली भूलों से भी बचाती है। मानव प्रबोधन प्रन्यास के विजेन्द्र सिंह भाटी ने बताया कि आज आज यज्ञ सम्राट पंडित नथमल जी पुरोहित का भी आशीवर्चन हुआ। इस सप्तदिवसीय कथा महोत्सव में धनश्याम साध, हिमांशु साध, आलोक साध, राजकुमार कौशिक, हरीशचंद्र शर्मा, घनश्याम स्वामी, भवानीशंकर व्यास, बजरंगलाल शर्मा, रमेश शर्मा, रामदयाल राजपुरोहित, विजय सिंह राठौड़, साकेत शर्मा, रमेश जोशी, श्यामसुंदर तिवारी, रमेश आचार्य, हरिओम पूंज, रमेश शर्मा, योगेश शर्मा, नंदू सिंह शेखावत, नंदकिशोर भाटी, प्रदीप देवड़ा, वी.के. व्यास, अनिल गौड़, मोहित अग्रवाल आदि का सहायोग रहा।
