

नारी और प्रकृति दोनों ही सृजनकर्ता
बीकानेर। नारी और प्रकृति दोनों ही सृजनकर्ता हैं। नारी सशक्तीकरण के लिए भी कौशल और पर्यावरण संवर्द्धन दोनों ही महत्वपूर्ण संस्कार हैं। ये उद्बोधन मुख्य अतिथि न्यायाधीश मांडवी राजवी, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर द्वारा कौशल का दशक और स्वच्छता पखवाड़ा के समापन समारोह में अभिव्यक्त किए।गिरिराज मोहता ने कहा कि व्यक्ति के संस्कारों में सबसे बड़ा गुण पवित्रता को माना जाता है। पवित्रता का मुख्य आधार स्वच्छता है। इसलिए स्वच्छता को हमें आचरण और व्यवहार में उतारना चाहिए। डॉ. विभा बंसल ने कहा कि स्वच्छता और कौशल व्यक्तित्व निर्माण के महत्वपूर्ण आधार हैं। हमें कुछ वैश्विक स्तर पर बढते प्रदुषणों जैसी अदृश्य अस्वच्छताओं के बारे में भी चिंतन करना चाहिए और उसके निवारण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।आयोजन के अंत में प्रशिक्षुओं को कौशल प्रशिक्षणों के प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।
