

प्राप्त को पर्याप्त समझें तथा अनुकूलता में प्रसन्न रहे
बीकानेर। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिन मणि प्रभ सूरीश्वरजी महाराज की आज्ञानुवर्ती गणिवर्य श्री मेहुल प्रभ सागर म.सा.,ने सोमवार को ढढ्ढा चौक क्षेत्र की ढढ्ढा कोटड़ी में कहा कि अनुकूलता में प्रसन्न रहते हुए देव, गुरु व धर्म की साधना, आराधना व भक्ति करें।उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में अधिकतर लोगों में 98 प्रतिशत अनुकूलता तथा 2 प्रतिशत प्रतिकूलता होती है। व्यक्ति प्रतिकूलता का रोना अधिक रोता है, जबकि संचित कर्मों से प्राप्त अनुकूलता, धन, संपत्ति, सुख व वैभव को भूल जाता है। मनुष्य को चाहिए कि परमात्मा की कृपा से मिली अनुकूलता पर परमात्मा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करें तथा नकारात्मक व प्रतिकूलता को अपने जीवन में हावी नहीं होने दें । मनुष्य देह, घर, परिवार सब कुछ परमात्मा की कृपा से मिलने के बावजूद लोग प्राप्त को पर्याप्त नहीं समझते लेकिन अपर्याप्त के लिए दुखी होते है।
