

जैन दर्शन के सिद्धांतों को जीवन व्यवहार में करें धारण
बीकानेर। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के संस्थापक आचार्य भिक्षु की जन्म त्रिशताब्दी समारोह के तृतीय दिवस पर कमल कुमार जी ने तेरापंथ का उद्भव विषय पर अपना उद्बोधन प्रदान करते हुए कहा कि जैन धर्म महान है, तेरापंथ महान है कहने से, शब्दों के उचारण से महान नही होता है। प्रत्येक व्यक्ति को इसका अध्ययन करना चाहिए। जिससे श्रद्धा विश्वास के साथ जुड़ा जा सके एवं जैन दर्शन के सिद्धांतों को जीवन व्यवहार में धारण करें। तेरापंथ आस्था विश्वास ओर समर्पण का धर्मसंघ है। गुरु के प्रति अटुट आस्था, धर्मसंघ के प्रति विश्वास ओर जिनवाणी के प्रति समर्पण यह त्रिवेणी व्यक्तियों को उच्चता प्रदान करती हैं। भीखण जी स्वामी सत्यनिष्ठ साधक संत थे।
