

पर्युषण पर्व पर 106 श्रावक-श्राविकाओं ने करवाया केशलोच
बीकानेर। छबीली घाटी स्थित सेवा सदन में पर्युषण पर्व के चौथे दिन आचार्य रामलाल म.सा. ने प्रवचन में कहा कि जैन धर्म में निर्धारित 12 व्रतों का पालन कर व्यक्ति अच्छा धार्मिक इंसान और आदर्श श्रावक-श्राविका बन सकता है। उन्होंने कहा कि आरंभ और परिग्रह का त्याग करते हुए नैतिक, धार्मिक एवं सामाजिक दायित्वों के साथ देव, गुरु और धर्म के प्रति अपने कर्तव्यों का उचित निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने पानी का सदुपयोग करने का भी संदेश दिया। सुरेश बच्छावत एवं कन्हैयालाल बैद ने बताया कि चारित्र आत्माओं की प्रेरणा से श्रावक-श्राविकाएं ‘पचखाण से निर्वाण’ अभियान के तहत नई उमंग और नए संकल्प के साथ सामूहिक नौ दिन सहित विभिन्न प्रकार की तपस्याएं कर रहे हैं। इस दौरान 106 श्रावक-श्राविकाओं ने अपने सिर के बालों का केशलोच करवाया। अमित गोलछा ने बताया कि जन-जन के आध्यात्मिक उत्थान के लिए ‘पचखाण से निर्वाण’ के नियमों के साथ प्रतिदिन आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं में श्रद्धालु उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। वहीं दोपहर में आयोजित ‘एक कदम मोक्ष की ओर’ शिविर में भी श्रावक-श्राविकाएं सक्रिय सहभागिता निभा रहे हैं। ‘पर्युषण के रंग, ज्ञान-ध्यान के संग’ अभियान के तहत 8 से 10 सितंबर तक विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। ज्ञानावरणीय एवं दर्शनावरणीय कर्म विषयक प्रतियोगिता में श्रीमती जया गोलछा, समता बांठिया एवं कोमल सुखलेचा प्रथम तथा भावना डागा एवं रंजू तातेड़ द्वितीय रहीं। वेदनीय कर्म विषयक प्रतियोगिता में विमला सुराणा, भावना डागा एवं शशिकला सेठिया ने प्रथम तथा समता बांठिया एवं जयश्री लोढ़ा ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। मोहनीय कर्म विषयक प्रतियोगिता में अंकिता ललवाणी, वंदना बोथरा एवं समता बांठिया प्रथम तथा कोमल सुखलेचा एवं भावना डागा द्वितीय रहीं।
