

सीखे गए कौशल को उद्यम जोड़ना ही सीखने की सार्थकता है
बीकानेर। कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों से आपने जो कौशल सीखा है उसे उद्यम से जोड़ने पर ही उसकी सार्थकता है। ये उद्बोधन मुख्य अतिथि डॉ. सुमन्त व्यास, कुलगुरु, पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर ने बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति द्वारा आयोजित मेजर जनरल जयदेवसिंह भार्गव स्मृति विचारपीठ के अंतर्गत प्रौढ़ शिक्षा भवन सभागार में व्यक्त किए। मुख्यअतिथि डॉ. व्यास ने कहा कि बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति की कार्य-गतिविधियों की सुगंध और साख ने न केवल बीकानेर बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। अध्यक्षीय उद्बोधन में राजकीय डूंगर महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य प्रो. लीलावती सोलंकी ने कहा कि व्यक्ति की सबसे बड़ी शक्ति उसकी आत्मनिर्भरता होती है और संस्था जिस प्रकार से आमजन को कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा रही है वह संस्था का सामाजिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य है।

प्रारंभ में जन शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष एडवोकेट गिरिराज मोहता ने आगंतुक अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन को शैक्षिक और कोशल विकास का संगम बताया। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, शॉल एवं स्मृतिचिन्ह प्रदान कर किया गया।
आयोजन के दूसरे सत्र में संस्था द्वारा बीकानेर जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित कौशल विकास प्रशिक्षणों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले चुनिंदा प्रशिक्षकों-संदर्भ व्यक्तियों को मेजर जनरल जयदेव सिंह भार्गव स्मृति सम्मान से पुरस्कृत भी किया गया। जिनमें बीकानेर शहरी क्षेत्र से श्रीमती पुष्पलता चौहान, एवं श्रीमती खुशबु भाटी, खाजूवाला से श्रीमती कौशल्या वर्मा, श्री कोलायत से श्रीमती सरोज कुमावत, नोखा से श्रीमती पोली सोनवाल, जामसर से श्री जितेन्द्र मोदी, लूणकरणसर से श्री बीरबलराम देहड़, श्रीडूंगरगढ़ से श्रीमती संपत प्रजापत को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में संस्था परिवार के श्री मुकेश व्यास ने आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
