

चातुर्मास काल तपस्या के लिए बहुत सातकारी
बीकानेर। विभिन्न स्थित तेरापंथ भवन (तुलसी साधना केंद्र) में शासनश्री मठाधीश मंजुप्रभाजी और शासनश्री मठाधीश कुंथुश्रीजी थाना – 12 का तीर्थ यात्रा चल रही है। चातुर्मास के इस पवित्र काल में साध्वियों ने श्रावक-श्राविका को धर्म आराधना के लिए प्रेरित किया। शासनश्री सारथि मंजुप्रभाजी ने आज अपने प्रवचन में कहा कि चातुर्मास का समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यह, तप त्याग, धर्म ध्यान, स्वाध्याय और जप जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष काल है। उन्होंने दैनिक उपदेश श्रवण, भगवान की वाणी पर ध्यान-मनन करना, आगमों और आध्यात्मिक साहित्य का पाठ-पाठ करना और प्रवचन को चातुर्मास काल के प्रमुख निगम बताया। सभी से सार्वभौम धर्म सचिवों की नियुक्ति की गई। शासनश्री नट कुंथुश्रीजी ने तपस्या के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि चातुर्मास काल तपस्या के लिए बहुत सातकारी (अनुकूल) समय होता है। उन्होंने उपवास, बेला, तेला, अठाइयां आदि जैसी लंबी तपस्याओं में भाग लेने का प्रयास करने को कहा। जो लंबी तपस्याएं नहीं कर सकतीं, उन्हें नवकारसी, आयम्बिल, प्रहार, एकासन आदि छोटी-छोटी तपस्याएं करके स्वयं को मोटा करने की प्रेरणा दी। ऑल्टजी ने बताया कि तपस्या से संचित कर्मों का क्षय होता है और यह मुक्ति का मार्ग एक महत्वपूर्ण साधन है।
