

तप आत्म शुद्धि के संस्कार को सुदृढ़ करता है
बीकानेर। आध्यात्मिक नवपद ओली पर्व के नौवें दिन रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में मुनि मीत प्रभ सागर, बीकानेर की साध्वी दीपमाला व शंखनिधि श्रीजी क सान्निध्य में तप पद की साधना-आराधना व क्रियाएं की गई। मेहुल प्रभ सागर ने प्रवचन में कहा कि बाह्य तप एकासना, बियासना, बेला, तेला के अट्ठाई आदि तप के साथ आंतरिक तप जरूरी है। आंतरिक तप में अधिकाधिक मंत्र जाप, स्वाध्याय, आत्म-परमात्म ध्यान करें तथा भोग विलास की भावना को त्याग कर मोक्ष का लक्ष्य रखे। इस अवसर पर जोधपुर के वयोवृद्ध चिकित्सक डॉ.गोविंद मल सिंघवीं, प्रसन्नलता, मनकौर सिंघवी का अभिनंदन सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के पूर्व मंत्री रतन लाल नाहटा, खतरगच्छ युवक परिषद की बीकानेर इकाई के उपाध्यक्ष कमल सेठिया, खरतरगच्छ महिला परिषद की मंत्री लीला बेगानी व ज्ञान वाटिका की प्रभारी सुनीता नाहटा ने किया।
