

पुण्य के लिए पुरुषार्थ करें
बीकानेर। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर ने बीकानेर की ढढ्ढा कोटड़ी में मंगलवार को चातुर्मासिक प्रवचन में कहा कि पुण्य संचय करें तथा पापों का विसर्जन करें। पुण्यार्थी का साथ लेना व देना तथा पुण्य के लिए पुरुषार्थ करना चाहिए। पापात्माओं के सहयोग व साथ से पुण्य क्षीण होता है तथा पाप प्रवृति बढती है।
उन्होंने कहा कि क्षमा कल्याणजी महाराज के संदेशों का स्मरण दिलाते हुए तथा दो कहानियों के माध्यम से कहा कि पुण्यशाली के साथ रहने अच्छे दिन शुरू हो सकते है वहीं पापियों के साथ रहने से पुण्य कमजोर व संकट आ सकता है। पाप का फल जरूर मिलता है, लोग हंसते-हंसते पाप कर्म करते है तथा रो-रोकर, कष्ट भोग कर उन्हें पापों का फल चुकाना होता है। पुण्य से सुख, समृद्धि व ऐश्वर्य बढ़ता है वहीं पापांं के उदय होने से व्यक्ति के चेहरे की हंसी समाप्त हो जाती है, उसके चेहरे की हवाइयां उड़ जाती है।
