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सामौर ने क्रांति के लिए कविताओं के माध्यम से बौद्धिक वातावरण निर्माण किया

दो दिवसीय समारोह का उद्घाटन
बीकानेर। साहित्य अकादेमी नई दिल्ली और लोकभारती , बोबासर के संयुक्त तत्वावधान में क्रांतिवीर कवि शंकरदान सामौर स्मृति दो दिवसीय समारोह के का उद्घाटन सोमवार को होटल राजमहल के सभागार में हुआ। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता ख्यातनाम कवि-आलोचक एवं साहित्य अकादमी में राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक प्रोफेसर अर्जुनदेव चारण ने की ।समारोह के मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष एस.पी.व्यास थे तथा राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर के अध्ययन केन्द्र की निदेशक दीपिका विजयवर्गीय
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रही। उद्घाटन सत्र का संचालन जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में राजस्थानी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.गजेसिंह राजपुरोहित ने किया। प्रारंभ में स्वागत भाषण अकादेमी के सचिव के. श्रीनिवास ने कहा कि साहित्य अकादेमी अपने पुराधा साहित्यकारों का स्मरण कर आने वाली पीढ़ी को अपनी विरासत से परिचित करवाने हेतु ये अत्यन्त महत्वपूर्ण आयोजन है। राव ने कहा कि शंकरदान सामौर शाम 1857 के प्रथम राष्ट्र कवि हैं।
अध्यक्षीय उद्‌बोधन में प्रो. अर्जुनदेव चारण ने कहा कि हमें शंकरदान सामौर को समझने के लिए उनके संघर्ष को समझना होगा। चारण ने कहा कि उन्होंने क्रांति के लिए अपनी कविता के द्वारा बौद्धिक वातावरण तैयार किया। उन्होंने कहा कि उनकी रचनाओं में देशभक्ति, अंग्रेजी हुकूमत का विरोध और सामाजिक एकता का स्वर मुखर किया। मुख्य अतिथि डा. एस. पी. व्यास, ने कहा कि पुनर्जागरण की तरह राजस्थान के इतिहास में 1857 क्रांति का वातावरण तैयार करने में शंकरदान सामौर ने महत्वपूर्ण कार्य किया और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाई।
विशिष्ट अतिथि डॉ. दीपिका विजयवर्गीय ने कहा कि क्रांतिचेता और महिमावान जनकवि की पहचान पूरे देश में हुई। उद्घाटन सत्र के उपरांत प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के पूर्व सचिव पृथ्वीराज रतनू ने की और इस में जयपुर के शोधार्थी निकिता शेखावत एवं हेमेन्द्र सिंह ने पत्रवाचन किया। इस सत्र का संचालन साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार ने किया। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता बुलाकी शर्मा ने की एवं नगेन्द्रनारायण किराडू तथा डॉ. संजू श्रीमाली ने इस सत्र में पत्रवाचन किया। अतिथियों को मधु आचार्य, राजेन्द्र जोशी, डॉ.अजय जोशी, डॉ.फारुख चौहान, भंवरसिंह सामौर, गीता सामौर ने शाल , माला एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया।

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