

कागज से स्क्रीन तक साहित्य का सफर, बदली पढ़ने और सोचने की आदतें
बीकानेर। राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से संस्कृति भवन में साहित्यकार समारोह आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रो. विमला डुकवाल ने कहा कि कागज से स्क्रीन तक पहुंचा साहित्य केवल माध्यम का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह मनुष्य की पढ़ने और सोचने की आदतों में आए बदलाव का भी प्रतीक है। संस्था की गतिविधियों की जानकारी साझा करते हुए श्याम महर्षि ने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती शब्दों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें पाठक तक इतनी गहराई से पहुंचाना है कि वह कुछ क्षण ठहरकर स्वयं से संवाद कर सके।
मुख्य वक्ता डॉ. मदन गोपाल लढ़ा ने कहा कि सृजन की दुनिया में कागज से स्क्रीन तक का सफर बहुवर्णी और बहुआयामी रहा है। प्रो. बच्छराज दुगड़ ने कहा कि माध्यम चाहे कागज हो या स्क्रीन, सृजन की अंतिम कसौटी यही है कि वह मनुष्य को भीतर से कितना छू पाता है। स्क्रीन ने हमारे हाथ में संसार दे दिया है, लेकिन साहित्य का काम आज भी हमें अपने भीतर का संसार दिखाना है।
साहित्यकारों का सम्मान
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में साहित्य एवं समाज सेवा के लिए सम्मान प्रदान किए गए। मधुकांत को मलाराम माली स्मृति साहित्यश्री सम्मान, डॉ. सूरजसिंह नेगी को डॉ. नन्दलाल महर्षि स्मृति हिन्दी सृजन पुरस्कार, डी.पी. पचीसिया, बीकानेर को रामकिशन उपाध्याय स्मृति समाज सेवा सम्मान, श्रीमती मीरा जैन, उज्जैन को शिवप्रसाद सिखवाल स्मृति महिला लेखन पुरस्कार, डॉ. सतीश कुमार को सुरेश कंचन ओझा लेखन पुरस्कार, अरविंद पथिक को चन्द्रमोहन हाड़ा हिमकर स्मृति उपन्यास लेखन पुरस्कार तथा लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव को श्यामसुन्दर नागला स्मृति बाल साहित्य पुरस्कार अर्पित किया गया।
समारोह में डॉ. सूरज सिंह नेगी, रवि पुरोहित, डॉ. मधुकांत, महावीर माली, विजय महर्षि, भवानी-कांति उपाध्याय, विनोद सिखवाल, पंकज बिंदिया ओझा, प्रशांत बिस्सा, रामचन्द्र राठी, बजरंग शर्मा, मदन सैनी, महावीर सारस्वत, डॉ. चेतन स्वामी, भरतसिंह राठौड़, मनमोहन कल्याणी, ओम गुरावा, गोपीराम नाई, डॉ. विनोद सुथार, नगरपालिका उपाध्यक्ष विनोद गिरी गुसाईं, सत्यनारायण योगी, दयाशंकर शर्मा, अम्बिका डागा, रेणु प्रजापत, तमन्ना झाबक, मधु झाबक, पूर्व पालिकाध्यक्ष मानमल शर्मा, गिरधारी सिंधी, विमल भाटी सहित अनेक साहित्यकार एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।
