

आत्मदर्शन, आत्ममंथन और आत्मकल्याण का पर्व है पर्यूषण
बीकानेर। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में साध्वी मंजुप्रभा के सान्निध्य में पर्यूषण महापर्व का शुभारंभ तुलसी साधना केन्द्र में हुआ। इस अवसर पर साध्वी गुरुयशाजी ने विपाक की दृष्टि से कर्मों को दो प्रकार का बताते हुए कहा कि कर्म शुभ और अशुभ होते हैं। मनुष्य को अपने किए कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है। इसलिए जीवन में सद्कर्मों को अपनाना आवश्यक है। साध्वी जयंतप्रभा ने पर्यूषण महापर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व आत्मदर्शन, आत्ममंथन, आत्मविकास एवं आत्मकल्याण का पर्व है। उन्होंने कहा कि पर्यूषण के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर झांककर आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ता है। साध्वी मंजुप्रभा ने भगवान महावीर के जीवन-चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तीर्थंकर प्रभु राग-द्वेष से मुक्त होते हैं। उनकी वाणी सर्वमंगलकारी एवं हितकारी होती है। भगवान महावीर के सिद्धांत आज भी मानव जीवन को संयम, अहिंसा और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं। पर्यूषण महापर्व के शुभारंभ अवसर पर आयोजित प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
