

राजस्थानी भाषा के हक में चुनाव प्रचार सामग्री में मातृभाषा के प्रयोग की अपील
बीकानेर। करोड़ों लोगों की जनभावना, अस्मिता एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी मातृभाषा राजस्थानी अपने वाजिब हक के लिए दशकों से इंतजार कर रही है। राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने, प्रदेश की दूसरी राजभाषा बनाने तथा प्राथमिक स्तर से उच्च शिक्षा तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा राजस्थानी किए जाने की मांग को लेकर राजस्थानी युवा लेखक संघ के माध्यम से नगर के हिंदी, उर्दू एवं राजस्थानी साहित्यकारों ने आगामी नगरीय निकाय चुनाव में सभी प्रत्याशियों से राजस्थानी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग की अपील की है। राजस्थानी मान्यता आंदोलन के प्रवर्तक कमल रंगा ने कहा कि शहर की सरकार चुनने के लिए होने वाले 80 वार्डों के चुनाव में प्रत्याशी मतदाताओं से संपर्क के दौरान मातृभाषा राजस्थानी का अधिकाधिक प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार सामग्री, पर्चों, पोस्टरों, बैनरों एवं अन्य प्रचार माध्यमों में भी राजस्थानी भाषा को प्राथमिकता देकर साहित्यकारों और आमजन की इस महत्वपूर्ण मांग को समर्थन दिया जा सकता है।
वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी, डॉ. मदन सैनी, बुलाकी शर्मा, जाकिर अदीब, कासिम बीकानेरी, जुगल किशोर पुरोहित, गिरिराज पारीक, इंद्रा व्यास, पुनीत कुमार रंगा, डॉ. नृसिंह बिन्नाणी, डॉ. फारूक चौहान, विप्लव व्यास, बाबूलाल छंगाणी, आनंद छंगाणी सहित अन्य साहित्यकारों ने सभी चुनाव प्रत्याशियों से अनुरोध किया कि वे अपनी चुनावी गतिविधियों में यथासंभव राजस्थानी भाषा का प्रयोग कर मातृभाषा के सम्मान में अपना महत्वपूर्ण भाषाई सहयोग प्रदान करें। साहित्यकारों ने कहा कि राजस्थानी की संवैधानिक मान्यता, प्रदेश की दूसरी राजभाषा का दर्जा तथा प्राथमिक स्तर से शिक्षा का माध्यम राजस्थानी किए जाने जैसी मांगों को लेकर चल रहे भाषा आंदोलन में जनप्रतिनिधियों एवं प्रत्याशियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी उम्मीदवारों से इस विषय पर गंभीरता से चिंतन-मनन करते हुए मातृभाषा राजस्थानी के हक में अपनी बात रखने का आह्वान किया।
