

संवेदना और अनुभूतियों की गहरी व्यंजना करती हैं रंगा की कविताएं
बीकानेर। प्रज्ञालय संस्थान की ओर से कवि सुमीत रंगा के दूसरे काव्य संग्रह ‘घर के इक कोने में’ का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार एवं आलोचक मालचंद तिवाड़ी ने की। इस अवसर पर मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि सुमीत रंगा ने अपनी कविताओं में संवेदना के धरातल पर अनुभूतियों की गहरी व्यंजना को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। उनकी कविताएं जीवन के विविध पक्षों, मानवीय संवेदनाओं और अनुभवों को सहजता के साथ पाठकों के सामने रखती हैं। उन्होंने काव्य संग्रह को समकालीन साहित्य में महत्वपूर्ण कृति बताया। कार्यक्रम में डॉ. मदन सैनी, मधु आचार्य, डॉ. फारूक चौहान, कासिम बीकानेरी सहित साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने सुमीत रंगा की रचनात्मक यात्रा और उनकी काव्य संवेदना पर चर्चा करते हुए नए संग्रह के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर कमल रंगा, जुगल किशोर पुरोहित, शिवप्रकाश शर्मा, राजेश रंगा, हरिनारायण आचार्य, गिरिराज पारीक, आशीष रंगा, अशोक शर्मा, नवनीत व्यास, किशन देराश्री, भवानी सिंह राठौड़, हेमलता व्यास, नेहा भोजक, बबीता पुरोहित, श्यामा स्वामी, सुमन खुड़िया, मुकेश देराश्री, तोलाराम सारण, घनश्याम ओझा, भैरूरतन, अरुण जे. व्यास, कृतिका रंगा सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
