

तकनीकी विश्वविद्यालय बीकानेर में पदोन्नति प्रक्रिया पर उठे सवाल, हाईकोर्ट नोटिस के बाद विवाद गहराया
बीकानेर। बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय में सहायक आचार्यों की पदोन्नति को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। आरोप है कि करोड़ों रुपये के वित्तीय लाभ देने के लिए अपात्र सहायक आचार्यों को कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत नियमों के विरुद्ध पदोन्नति देने की तैयारी की जा रही है। इस मामले में कुलपति (वीसी) और रजिस्ट्रार के बीच मतभेद की स्थिति भी सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय की ओर से तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को अधिवक्ता मुकुल कृष्ण व्यास के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में विश्वविद्यालय द्वारा की जा रही पदोन्नति प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण मांगा गया है और विधिसम्मत कार्रवाई करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
संविदा नियुक्ति के बावजूद पदोन्नति का आरोप
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2004 में तकनीकी शिक्षा विभाग ने तत्कालीन इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर (ईसीबी) को तीन वर्ष की संविदा पर शैक्षणिक स्टाफ नियुक्त करने की अनुमति दी थी। इसके तहत वर्ष 2005-06 में करीब 35 सहायक आचार्यों की नियुक्ति तीन वर्ष के अनुबंध पर की गई थी, जिनका कार्यकाल 2009 में समाप्त हो गया। आरोप है कि अनुबंध समाप्त होने के बावजूद इन कार्मिकों को नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन और अन्य वित्तीय लाभ दिए जाते रहे और अब उन्हें पदोन्नति देने का प्रयास किया जा रहा है।
BOМ बैठक में टेबल एजेंडा पर शामिल करने का प्रयास
बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय की बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (BOМ) बैठक में पदोन्नति का मुद्दा पूर्व निर्धारित एजेंडा में शामिल नहीं था। इसे अंतिम समय में टेबल एजेंडा के रूप में शामिल करने का प्रयास किया गया, जिस पर रजिस्ट्रार ने आपत्ति दर्ज कराई। रजिस्ट्रार का तर्क था कि संविदा पर नियुक्त और विवादित नियुक्तियों वाले कार्मिकों को पदोन्नति देना नियमों और संविधान के विरुद्ध है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि जनवरी में हुई BOМ बैठक के तीन सप्ताह बाद भी बैठक के मिनट्स जारी नहीं किए गए हैं, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हाईकोर्ट में वाद, विधिक प्रक्रिया पर उठे प्रश्न
राजीव नगर निवासी राजूराम चौधरी ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में वाद दायर किया है। उनके अधिवक्ता मुकुल कृष्ण व्यास द्वारा जारी नोटिस में विश्वविद्यालय से पूरी प्रक्रिया का विधिक आधार स्पष्ट करने और नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है।
अन्य कर्मचारियों को नहीं मिल रहा पीएफ लाभ
आरोप यह भी है कि विश्वविद्यालय में संविदा पर कार्यरत अशैक्षणिक कर्मचारियों को पीएफ और अन्य वित्तीय लाभ नहीं दिए जा रहे, जबकि विवादित नियुक्तियों वाले सहायक आचार्यों को पदोन्नति देने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। इससे कर्मचारियों में असंतोष का माहौल है।
भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप
जानकारी के अनुसार, कुछ संबंधित शिक्षकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में पूर्व में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और अभियोजन स्वीकृति भी जारी की जा चुकी है। इसके बावजूद पदोन्नति देने का प्रयास गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। अब सभी की नजर हाईकोर्ट और राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
