Bikaner Bikaner District Rajasthan साहित्य एवं कला

ज़हीन, डॉ. आचार्य एवं स्वर्णकार को नरपत सिंह सांखला साहित्य-सम्मान

कविता और सामाजिक यथार्थ के बीच गहरा सबंध है
बीकानेर। हिन्दी-राजस्थानी के प्रसिद्ध साहित्यकार कीर्तिशेष नरपत सिंह सांखला की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर सांखला साहित्य सदन में त्रिभाषा काव्य-गोष्ठी एवं नरपत सिंह सांखला साहित्य-सम्मान समारोह का आयोजन वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा की अध्यक्षता में हुआ। संस्था के संस्थापक, समन्वयक, शिक्षाविद्-कवि संजय सांखला ने बताया कि अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कमल रंगा ने कहा की नई कविता सामाजिक यथार्थ तथा उसमें व्यक्ति की भूमिका को परखने का उपक्रम है। इसके कारण ही नई कविता और सामाजिक यथार्थ के बीच गहरा संबंध है। इस कसौटी पर आज की त्रिभाषा काव्य-गोष्ठी सकारात्मक पहल है।
संस्थान के सचिव वरिष्ठ शायर कासिम बीकानेरी ने इस अवसर पर कीर्तिशेष नरपत सिंह सांखला के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें बहुभाषी प्रतिभावान साहित्यकार बताते हुए कहा कि उन्होने साहित्य के अलावा शिक्षा एवं समाज सेवा के क्षेत्र में भी अपनी महत्वपूर्ण एवं रचनात्मक भूमिका का निवर्हन किया था।
इस अवसर पर साहित्यकार सम्मान-समारोह के तहत तीनों भाषाओं के रचनाकारों यथा बुनियाद हुसैन ज़हीन, राजाराम स्वर्णकार एवं डॉ. कृष्णा आचार्य का समारोह के अध्यक्ष कमल रंगा एवं संस्था के संजय सांखला व कासिम बीकानेरी ने माला, शॉल, दुपट्टा, प्रतीक चिह्न, उपहार आदि अर्पित कर उनका नरपत सिंह सांखला साहित्य-सम्मान किया। इस विश्ेष समारोह में जाकिर अदीब, डॉ. अजय जोशी, इन्द्रा व्यास, राजेन्द्र जोशी, बी.एल. नवीन, शहीद अहमद, प्रेम नारायण व्यास, भवानी शंकर, यशस्वी हर्ष, डॉ. मोहम्मद फारूक चौहान, शक्कूर बीकाणवी, हरिकिशन व्यास, देवी चन्द्र पंवार, गंगाबिशन बिश्नोई, हीरालाल, देवीलाल, नरेन्द्र कटारिया सहित कई गणमान्य एवं काव्य रसिकों की गरिमामय साक्षी रही। अंत में सभी का आभार डॉ. अजय जोशी ने ज्ञापित किया।

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